आज में गुरूजी के वो सदशिष्य के बारे में लिखने जा रहा हु. जिसके कारनामो की आज गुजरात ही नहीं पर पूरा देश सराहना कर रहा हे . देश के युवा अवं हरेक वो शख्स जो सुरक्षा सेवा से जुड़ा हो वो आज उसे अपना आदर्श मानते हे . जिन्होंने गुजरात को दुशारा कश्मीर बनने से रोका . जी हा में बात कर रहा हु डी जी वंजारा की जिसका पूरा नाम " डाह्याजी गोबरजी वंजारा " . हाल कुश ही दिनों में वंजाराजी ने बापूजी से मुलाकात की ये हम जानते हे , पर क्या हम ये जानते हे जो कई दशको से बापूजी के साधक हे , जेल अपनी कुटिया में बापूजी की तसवीर साथ रखते थे , जब वो साबरमती जेल में थे तब हमेशा मोटेरा आश्रम से फल फुल दूध जो कुश भी भेजा जाता तो वो प्रसाद समजकर ग्रहण करते और उसके वो आग्रही थे . एक बार रिपोटर के पूछने पर कहा था " वो अख़बार या TV नहीं देखते बल्कि अपने गुरु बापूजी के सत्संग वाणी से प्रेरणा मिलती हे " अपने ७-८ साल जेल के दोरान बापूजी समर्पित कई कविताये लिखी , जिनमे से एक जो 7-07-2007 को साबरमती जेल से गुरुपूर्णिमा पर लिखी थी " मेने आज ...